You Have Authority (Hindi)

Ankit Sajwan

Paperback • 173 Pages • ₹ 300.00 • Hindi
No ratings yet
Publisher Ankit Sajwan
ASIN/SKU B0F9Y4PS4P
Book Format Paperback
Language Hindi
Pages 173
List Price ₹ 300.00
Publishing Date 24/04/2025
Dimensions 21.59 x 13.97 x 1.5 cm
Weight 200 g
Book Code BD00070774

Discover You Have Authority (Hindi) by Ankit Sajwan. This book is published by Ankit Sajwan in Paperback format, ASIN B0F9Y4PS4P, under Christian Books and Bibles, Christianity.

Book Description

अगर मैं आपसे कहूँ की अभी इसी पल आपकी ज़िन्दगी के लिए एक युद्ध चल रहा है यह युद्ध किसी दूर देश में नहीं, न ही किसी अख़बार या खबर में है बल्कि जहाँ अभी आप बैठे हैं, वहीँ हो रहा है। एक युद्ध है आपके मन के लिए । आपकी सेहत के लिए । आपके वैवाहक जीवन के लिए । आपके परिवार के लिए । आपके जीवन के उद्देश्य के लिए । और इस युद्ध की सबसे खतरनाक बात क्या है? ज़्यादातर लोगों को पता ही नहीं चलता की वह युद्ध में हैं क्योंक यह अदृश्य है। कई लोगों को अंदाज़ा ही नहीं होता की उनकी ज़िन्दगी में असली समस्या क्या है। इस वजह से वह गलत लड़ाइयाँ लड़ते हैं कभी लोगों को दोष देते हैं, कभी परिस्थतयों को, और कभी खुद को। यह किताब आपकी आँखें खोलने में मदद करेगी ताकि आप इस युद्ध को पहचान सकें और उससे भी ज़्यादा ज़रूरी, आप उस जय में चल सकें जो यीशु मसीह ने आपके लिए पहले से ही जीत ली है। यह किताब आपको आपके अधिकार के प्रति जागृत करने में मदद करेगी। क्योंक जिस पल आपने यीशु को अपना जीवन दिया था, उसी पल आप एक आत्मिक लड़ाई में आ गए थे, और परमेश्वर ने आपको साथ लड़ने के लिए नहीं—बिल्क जीतने के लए बुलाया है।

Author Biography

Apostle Ankit Sajwan is the founder of Ankit Sajwan Ministries and senior pastor of FOLJ Church – a vibrant, dynamic and fast-growing church in New Delhi, India, a ministry called by God to teach Faith to the Nations and see the captives set free.

He was born in a Hindu family and was saved through a radical encounter at the age of 19 when Lord Jesus healed him and pulled him out of his bed of sickness.

He has impacted church leaders and believers worldwide by his teaching on faith. His passion is to raise a generation of sons of God who walk in dominion and authority.

Apostle Ankit along with his wife Pastor Monika are on a mission to reveal God’s goodness, His love, and His power in these current times. It is their heart for all people to know who they truly are in Christ, and to know all that He has provided for them.

They declare the Word of God with great boldness; as a result, miraculous healings are common in their ministry. Multitudes are transformed by listening and applying the Word that is preached by them.

His children, Eliana, Amaya and Judah are a great source of joy and support to him.

Editorial Reviews

Editorial Reviews will be added soon…

Book Summary

You Have Authority: How to Win Spiritual Battles the Way Jesus Did अनकिट सजवान की एक ईसाई आध्यात्मिक पुस्तक है, जिसका मूल विषय है—मसीह में विश्वास रखने वाले व्यक्ति को मिली आत्मिक पहचान, अधिकार और उस अधिकार का सही उपयोग। पुस्तक का केंद्रीय विचार यह है कि ईसाई जीवन केवल परिस्थितियों को सहते हुए आगे बढ़ने का नाम नहीं है, बल्कि यीशु मसीह में प्राप्त विजय को पहचानकर उस विजय के आधार पर जीवन जीने का आह्वान है। पुस्तक के आधिकारिक विवरण के अनुसार, लेखक उस अदृश्य युद्ध की ओर ध्यान दिलाते हैं जो मन, स्वास्थ्य, परिवार, विवाह, उद्देश्य और जीवन के अन्य क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है। लेखक का उद्देश्य पाठक को यह समझाना है कि हर संघर्ष के पीछे केवल दिखाई देने वाली परिस्थितियाँ ही नहीं होतीं और इसलिए व्यक्ति को गलत जगह लड़ने के बजाय आत्मिक वास्तविकताओं को पहचानना सीखना चाहिए।

पुस्तक की शुरुआत एक ऐसे प्रश्न से होती है जो पूरे विचार को दिशा देता है—यदि आपके जीवन में एक अदृश्य युद्ध चल रहा हो और आपको उसका पता ही न हो, तो आप उससे कैसे लड़ेंगे? लेखक के अनुसार बहुत-से लोग अपने जीवन की समस्याओं के लिए केवल लोगों, परिस्थितियों या स्वयं को दोष देते रहते हैं। जब कोई रिश्ता टूटता है, काम में असफलता आती है, मन में भय भर जाता है या भविष्य अनिश्चित दिखाई देता है, तो मनुष्य स्वाभाविक रूप से बाहरी कारण खोजता है। लेकिन पुस्तक पाठक को इससे आगे देखने के लिए कहती है। इसका दृष्टिकोण यह है कि ईसाई को अपने संघर्षों को केवल भौतिक या भावनात्मक स्तर पर नहीं, बल्कि आत्मिक दृष्टि से भी समझना चाहिए। इसीलिए पुस्तक का शीर्षक केवल प्रेरणादायक वाक्य नहीं है; “Authority” अर्थात अधिकार पुस्तक की पूरी सोच का आधार बन जाता है।

सजवान के अनुसार इस अधिकार का स्रोत मनुष्य स्वयं नहीं है। ईसाई का अधिकार यीशु मसीह से आता है। इसलिए आत्मिक अधिकार का अर्थ यह नहीं है कि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से संसार या दूसरे लोगों पर नियंत्रण कर सकता है। इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति मसीह से जुड़ा है, वह उस अधिकार और विजय में खड़ा होना सीखता है जो उसे मसीह के माध्यम से प्राप्त हुई है। पुस्तक इसी पहचान को जागृत करने की कोशिश करती है। लेखक के आधिकारिक परिचय में भी यह बात सामने आती है कि उनका व्यापक सेवाकार्य विश्वास, आत्मिक अधिकार और लोगों को मसीह में अपनी पहचान समझने के लिए प्रेरित करने पर केंद्रित है।

पुस्तक का एक महत्वपूर्ण संदेश यह है कि आत्मिक युद्ध का पहला क्षेत्र अक्सर मन होता है। भय, निराशा, अपराधबोध, असुरक्षा और लगातार नकारात्मक विचार व्यक्ति की दृष्टि को प्रभावित कर सकते हैं। जब मनुष्य किसी परिस्थिति को अपनी अंतिम सच्चाई मान लेता है, तो उसका व्यवहार भी उसी के अनुसार होने लगता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति लगातार यह मानता रहे कि वह असफल है, उसके लिए कुछ अच्छा नहीं हो सकता या उसकी परिस्थितियाँ कभी नहीं बदलेंगी, तो वह अपने भीतर हार स्वीकार करना शुरू कर सकता है। पुस्तक पाठक को ऐसे विचारों के सामने परमेश्वर के वचन और विश्वास की दृष्टि से खड़े होने के लिए प्रेरित करती है।

यहाँ पुस्तक का जोर केवल सकारात्मक सोच पर नहीं है। इसका आधार ईसाई विश्वास और बाइबिल के वचन हैं। लेखक के दृष्टिकोण में विश्वास का अर्थ वास्तविकता से भागना नहीं, बल्कि परिस्थितियों के बीच परमेश्वर की सच्चाई पर टिके रहना है। यही कारण है कि पुस्तक में आत्मिक अधिकार को विश्वास से अलग करके नहीं देखा जाता। अधिकार का प्रयोग तभी सार्थक है जब व्यक्ति को यह विश्वास हो कि वह किसके अधिकार में खड़ा है। इस प्रकार पहचान, विश्वास और अधिकार तीनों एक-दूसरे से जुड़े हुए दिखाई देते हैं।

पुस्तक का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि लेखक पाठक को केवल अपने संघर्षों की पहचान करने के लिए नहीं कहते, बल्कि यह भी समझाते हैं कि युद्ध कैसे लड़ा जाए। यीशु का जीवन यहाँ एक आदर्श के रूप में सामने आता है। पुस्तक का पूरा उपशीर्षक ही है—“How to Win Spiritual Battles the Way Jesus Did.” अर्थात आत्मिक संघर्षों को यीशु के तरीके से जीतना। इसका अर्थ है कि मसीही जीवन में शक्ति का प्रदर्शन केवल ऊँची आवाज़, बाहरी दृढ़ता या भावनात्मक उत्साह से नहीं होता। यीशु का उदाहरण परमेश्वर के वचन, विश्वास, प्रार्थना, आज्ञाकारिता और परमेश्वर पर निर्भरता की ओर संकेत करता है।

इस संदर्भ में “अधिकार” का अर्थ किसी दूसरे व्यक्ति को दबाना नहीं बल्कि उस आत्मिक स्थिति में खड़ा होना है जो मसीह में मिली है। यह अंतर पुस्तक को समझने के लिए बहुत आवश्यक है। यदि अधिकार को केवल व्यक्तिगत शक्ति मान लिया जाए, तो उसका अर्थ पूरी तरह बदल जाता है। लेकिन जब इसे मसीह से प्राप्त अधिकार के रूप में देखा जाता है, तब व्यक्ति का ध्यान अपनी क्षमता से हटकर यीशु पर केंद्रित होता है। इस दृष्टिकोण से पुस्तक पाठक को आत्मविश्वास तो देती है, लेकिन उस आत्मविश्वास की जड़ व्यक्तिगत सामर्थ्य नहीं बल्कि मसीह में पहचान है।

लेखक का एक प्रमुख उद्देश्य ईसाइयों को भय की मानसिकता से बाहर निकालना भी दिखाई देता है। पुस्तक का संदेश यह है कि विश्वासी को हर समय पराजित, असहाय और परिस्थितियों का शिकार मानकर नहीं जीना चाहिए। यदि मसीह में विजय उपलब्ध है, तो विश्वासी को उस विजय को समझना और उसमें चलना चाहिए। यह विचार पुस्तक के आधिकारिक परिचय में भी स्पष्ट है, जहाँ कहा गया है कि पाठक को केवल युद्ध में टिके रहने के लिए नहीं, बल्कि मसीह के द्वारा पहले से जीती गई विजय में चलने के लिए बुलाया गया है।

यह विचार दैनिक जीवन से भी जुड़ता है। उदाहरण के लिए, यदि परिवार में लगातार तनाव है, तो पुस्तक व्यक्ति को केवल दूसरे सदस्य को दोष देने के बजाय यह देखने के लिए प्रेरित करती है कि वह स्वयं किस प्रकार प्रतिक्रिया दे रहा है। यदि मन भय से भरा है, तो केवल भय के बारे में सोचते रहने के बजाय विश्वास और परमेश्वर के वचन की ओर लौटने की आवश्यकता बताई जाती है। यदि व्यक्ति अपने उद्देश्य को लेकर भ्रमित है, तो परिस्थितियों की आवाज़ के बजाय परमेश्वर की इच्छा और अपनी मसीही पहचान को आधार बनाने की प्रेरणा दी जाती है। इस तरह पुस्तक का आत्मिक युद्ध केवल किसी रहस्यमय अनुभव तक सीमित नहीं रहता; वह जीवन के व्यावहारिक क्षेत्रों से जुड़ जाता है।

प्रार्थना भी इस सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आत्मिक अधिकार को लेखक ऐसी स्वतंत्र शक्ति के रूप में प्रस्तुत नहीं करते जिसे व्यक्ति परमेश्वर से अलग होकर इस्तेमाल कर सके। ईसाई जीवन में प्रार्थना का अर्थ परमेश्वर से जुड़ना, उसकी इच्छा को समझना और उसके वचन के अनुसार विश्वास में खड़ा होना है। इसलिए अधिकार का सही उपयोग आत्मनिर्भरता नहीं, बल्कि परमेश्वर पर निर्भरता पैदा करता है। यह दृष्टिकोण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि आध्यात्मिक शक्ति की भाषा कभी-कभी व्यक्ति को यह भ्रम दे सकती है कि वह अपनी इच्छाओं को परमेश्वर पर थोप सकता है। पुस्तक को समझते समय यह अंतर बनाए रखना आवश्यक है कि ईसाई अधिकार मसीह से प्राप्त अधिकार है, स्वतंत्र मानवीय नियंत्रण नहीं।

पुस्तक का संदेश स्वास्थ्य और शारीरिक संघर्षों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण हो जाता है। लेखक की व्यापक सेवाकार्य संबंधी सामग्री विश्वास और चंगाई पर जोर देती है, और पुस्तक स्वयं जीवन पर होने वाले अदृश्य संघर्षों में स्वास्थ्य को भी शामिल करती है। इस दृष्टिकोण में विश्वास व्यक्ति को बीमारी या कठिनाई के सामने निराश होकर हार मानने के बजाय परमेश्वर की ओर देखने के लिए प्रेरित करता है। साथ ही, ऐसे विषयों को पढ़ते समय यह समझना उपयोगी है कि किसी व्यक्ति की बीमारी या कठिनाई को सीधे उसके “कम विश्वास” का प्रमाण मान लेना एक बहुत बड़ा सरलीकरण होगा। पुस्तक का संदेश विश्वास की ओर बुलाता है, लेकिन पाठक के लिए आत्मिक विश्वास और वास्तविक जीवन की जटिलताओं के बीच संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है।

इसी तरह पुस्तक परिवार और विवाह को भी आत्मिक संघर्ष के महत्वपूर्ण क्षेत्रों के रूप में देखती है। जब संबंधों में गलतफहमी, क्रोध या दूरी आती है, तब व्यक्ति आसानी से दूसरे को अपना शत्रु समझ सकता है। पुस्तक का दृष्टिकोण इसके विपरीत है—समस्या को पहचानो, लेकिन व्यक्ति को शत्रु मत बनाओ। ईसाई दृष्टिकोण में संघर्ष का समाधान प्रेम, सत्य, क्षमा, प्रार्थना और सही आत्मिक दृष्टि से जुड़ा है। यह विचार पुस्तक के व्यापक उद्देश्य से मेल खाता है: गलत लड़ाई लड़ने के बजाय सही लड़ाई को पहचानना।

पुस्तक पाठक को यह भी सिखाती है कि आत्मिक जागरूकता केवल संकट के समय उपयोग की जाने वाली चीज़ नहीं है। यदि व्यक्ति केवल समस्या आने के बाद परमेश्वर को याद करता है, तो उसकी आत्मिक समझ परिस्थितियों से नियंत्रित होती रहती है। इसके विपरीत, एक जागरूक विश्वासी अपने मन, विचारों, शब्दों, आदतों और निर्णयों पर ध्यान देता है। वह यह समझने की कोशिश करता है कि कौन-सी बातें उसके विश्वास को मजबूत कर रही हैं और कौन-सी बातें उसे भय और निराशा की ओर ले जा रही हैं।

इस पुस्तक का एक मानवीय पक्ष यह भी है कि यह पाठक को केवल “मजबूत बनो” कहकर छोड़ नहीं देती। आत्मिक संघर्षों की बात करते हुए वह यह स्वीकार करने की दिशा में ले जाती है कि मनुष्य वास्तव में संघर्ष करता है। भय वास्तविक महसूस हो सकता है, परिस्थितियाँ कठिन हो सकती हैं और भविष्य अस्पष्ट हो सकता है। लेकिन पुस्तक का संदेश यह है कि इन अनुभवों को अंतिम सत्य नहीं मानना चाहिए। मसीही विश्वास व्यक्ति को कठिनाई से इनकार करना नहीं सिखाता; बल्कि कठिनाई के बीच एक बड़ी आशा को पकड़ना सिखाता है।

लेखक की शैली का उद्देश्य अकादमिक धर्मशास्त्र प्रस्तुत करना नहीं बल्कि पाठक को जागृत करना है। पुस्तक अपेक्षाकृत छोटी है—Goodreads इसे 109-पृष्ठ की Kindle Edition के रूप में सूचीबद्ध करता है—और इसका केंद्रीय उद्देश्य स्पष्ट, सीधा और प्रेरक है। इस कारण इसे ऐसे पाठक के लिए समझना आसान है जो आत्मिक युद्ध, विश्वास और मसीह में अपने अधिकार को व्यावहारिक भाषा में समझना चाहता है।

अंततः You Have Authority का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि ईसाई की पहचान उसकी परिस्थितियों से निर्धारित नहीं होती। व्यक्ति भय, असफलता, बीमारी, पारिवारिक संघर्ष या अनिश्चितता से गुजर सकता है, लेकिन लेखक उसे इन परिस्थितियों के आधार पर अपनी आत्मिक पहचान तय करने से रोकते हैं। पुस्तक उसे यीशु की ओर देखने, परमेश्वर के वचन पर विश्वास करने और मसीह में मिली विजय को समझने के लिए प्रेरित करती है।

इस पुस्तक को केवल “आत्मिक युद्ध कैसे जीतें” की किताब के रूप में देखना इसके व्यापक संदेश को छोटा कर देगा। वास्तव में यह पहचान और दृष्टिकोण की पुस्तक भी है। लेखक पाठक से मूलतः यह पूछते हैं कि जब जीवन कठिन हो जाता है, तब आप स्वयं को कौन समझते हैं? क्या आप परिस्थितियों के अधीन व्यक्ति हैं, या मसीह में अपनी पहचान और परमेश्वर के वचन पर टिके हुए विश्वासी हैं? पुस्तक का उत्तर स्पष्ट है—विश्वासी को भय और पराजय की मानसिकता में नहीं, बल्कि मसीह में मिली विजय और अधिकार की समझ के साथ जीना चाहिए।

इस दृष्टि से You Have Authority उन पाठकों के लिए विशेष रूप से अर्थपूर्ण हो सकती है जो ईसाई विश्वास को केवल सिद्धांत के रूप में नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों में जीना चाहते हैं। इसका संदेश आत्मिक जागरूकता, विश्वास, प्रार्थना, परमेश्वर के वचन और मसीह में पहचान को एक साथ जोड़ता है। पुस्तक का अंतिम आह्वान यही है कि व्यक्ति अपनी समस्याओं से भागे नहीं, हर परिस्थिति से डरे नहीं और हर संघर्ष को गलत दृष्टि से न देखे। वह यह पहचाने कि वह किसके साथ खड़ा है, किस अधिकार के अधीन है और उसे किस विजय में चलने के लिए बुलाया गया है। इस प्रकार पुस्तक पाठक को केवल संघर्षों के बारे में सोचने के लिए नहीं, बल्कि अपने विश्वास को अधिक जागरूक, साहसी और उद्देश्यपूर्ण तरीके से जीने के लिए प्रेरित करती है।

Sample Chapters

Sample Chapters will be added soon…
Indian Books
Indian Books
Catalog Manager