Antaheen । अंतहीन [अंडरवर्ल्ड, जो केवल रूप बदलता है]
Paperback
• 288 Pages
• ₹ 349.00
• Hindi
• 9788119555062
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| Publisher | Hind Yugm |
|---|---|
| ISBN13 | 9788119555062 |
| ASIN/SKU | 8119555066 |
| Book Format | Paperback |
| Language | Hindi |
| Pages | 288 |
| List Price | ₹ 349.00 |
| Publishing Date | 23/06/2026 |
| Dimensions | 14 x 1.6 x 21.6 cm |
| Weight | 270 g |
| Book Code | BD00070086 |
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Discover Antaheen । अंतहीन [अंडरवर्ल्ड, जो केवल रूप बदलता है] by Rajesh Pandey. This book is published by Hind Yugm in Paperback format, ISBN 9788119555062, ASIN 8119555066, under Politics and Social Sciences, Public Administration, Political Theory.
Book Description
बंबई की चमक-दमक में पैसा ही नहीं, सब कुछ था। एंटरटेनमेंट... एंटरटेनमेंट... और एंटरटेनमेंट... जहाँ सारी रंगीनियाँ थीं। इन रंगीनियों की हफ़्ता-वसूली से पैदा हुए बंबई के अंडरवर्ल्ड में हाजी मस्तान, करीम लाला और वरदराजन मुलदियार थे। दक्षिण भारतीयों के ख़िलाफ़ बाला साहेब ठाकरे का आंदोलन हिट हुआ और मराठी मूल के दाऊद इब्राहीम ने सबको चलता कर दिया। उसने ख़ुद को शहंशाह बना लिया। अबू सलेम के हाथों टी-सीरीज़ वाले गुलशन कुमार की दिन-दहाड़े हत्या ने अंडरवर्ल्ड का साम्राज्य मज़बूत कर दिया... और फिर वह मोड़ आया जिसने अंडरवर्ल्ड को बाँट दिया।
अपराध की न कोई जाति होती है, न धर्म, लेकिन मज़हब आड़े आ गया। बाबरी मस्जिद विध्वंस से अचानक दाऊद इब्राहीम के अंदर का मुसलमान जाग उठा। छोटा राजन, अरुण गवली और बबलू श्रीवास्तव का हिंदुत्व उबाल मार गया। अंडरवर्ल्ड ध्रुवीकरण का शिकार हो गया। इसका अंतःपुर बेचैन हो उठा। बंबई बम ब्लास्ट से दाऊद और बबलू की अदावत ने पासा पलटा, आफ़ताब अंसारी सामने आया। गौतम अडाणी का अपहरण, ताबडतोड़ बमबाज़ी, हत्याएँ, बलात्कार और फ़ायरिंग... फिर लारेंस बिश्नोई का उदय... नरम आतंकवाद और छिड़ गया एक ‘अंतहीन’ घमासान।
अपराध की न कोई जाति होती है, न धर्म, लेकिन मज़हब आड़े आ गया। बाबरी मस्जिद विध्वंस से अचानक दाऊद इब्राहीम के अंदर का मुसलमान जाग उठा। छोटा राजन, अरुण गवली और बबलू श्रीवास्तव का हिंदुत्व उबाल मार गया। अंडरवर्ल्ड ध्रुवीकरण का शिकार हो गया। इसका अंतःपुर बेचैन हो उठा। बंबई बम ब्लास्ट से दाऊद और बबलू की अदावत ने पासा पलटा, आफ़ताब अंसारी सामने आया। गौतम अडाणी का अपहरण, ताबडतोड़ बमबाज़ी, हत्याएँ, बलात्कार और फ़ायरिंग... फिर लारेंस बिश्नोई का उदय... नरम आतंकवाद और छिड़ गया एक ‘अंतहीन’ घमासान।
Author Biography
राजेश पाण्डेय का जन्म 15 जून 1961 को लालापुर, प्रयागराज में हुआ। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से वनस्पति शास्त्र में एम.एससी. किया और इसी विषय में जेआरएफ़ व एसआरएफ़ रहे। 1986 में यूपी पुलिस प्रांतीय सेवा में चुने गए, 2003 बैच के आईपीएस बने और 30 जून 2021 को सेवानिवृत्त हुए।
वह लखनऊ सहित छह ज़िलों के एसएसपी और पाँच ज़िलों के एसपी रहे। साथ ही बरेली पुलिस रेंज के डीआईजी और आईजी ज़ोन भी रहे तथा डीजीपी मुख्यालय में आईजी इलेक्शन के रूप में सेवाएँ दीं। अयोध्या बम धमाका (5 जुलाई 2005) की विशेष जाँच टीम में शामिल रहे। वह यूपी एसटीएफ़ और एटीएस के संस्थापक सदस्यों में भी शामिल थे तथा 2016 में एएसपी एटीएस के रूप में तैनात रहे। 2008-09 में संयुक्त राष्ट्र की पीसकीपिंग फ़ोर्स में डेपुटेशन के दौरान उन्होंने कोसोवो पुलिस के साथ डीजी बॉर्डर एंड बाउंड्री पुलिस के सलाहकार के रूप में कार्य किया। 2010 में रॉयल इंस्टिट्यूट ऑफ़ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, लंदन में प्रशिक्षण प्राप्त किया।
1999 से 2016 के बीच उन्हें 4 बार राष्ट्रपति का ‘पुलिस वीरता मेडल’ मिला। इसके अलावा राष्ट्रपति का ‘सराहनीय सेवा मेडल’ (2005), ‘यूनाइटेड नेशंस मेडल फ़ॉर पीसकीपिंग इन कोसोवो’ (2008), ‘सिल्वर कमेंडेशन डिस्क’ (2018), ‘गोल्ड कमेंडेशन डिस्क’ (2020) और ‘प्लेटिनम डिस्क’ (2021) से भी सम्मानित किया गया।
वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) में मुख्य महाप्रबंधक (सड़क सुरक्षा एवं यातायात) के पद पर कार्यरत हैं। उनकी अँग्रेज़ी में दो पुस्तकें—‘ऑपरेशन बज़ूका’ और ‘बैज एंड द बुलेट’ तथा हिंदी में ‘वर्चस्व’ प्रकाशित हैं। ‘वर्चस्व’ को 2025 में ‘राजभाषा गौरव पुरस्कार-2024’ का प्रथम पुरस्कार भी मिल चुका है।
वह लखनऊ सहित छह ज़िलों के एसएसपी और पाँच ज़िलों के एसपी रहे। साथ ही बरेली पुलिस रेंज के डीआईजी और आईजी ज़ोन भी रहे तथा डीजीपी मुख्यालय में आईजी इलेक्शन के रूप में सेवाएँ दीं। अयोध्या बम धमाका (5 जुलाई 2005) की विशेष जाँच टीम में शामिल रहे। वह यूपी एसटीएफ़ और एटीएस के संस्थापक सदस्यों में भी शामिल थे तथा 2016 में एएसपी एटीएस के रूप में तैनात रहे। 2008-09 में संयुक्त राष्ट्र की पीसकीपिंग फ़ोर्स में डेपुटेशन के दौरान उन्होंने कोसोवो पुलिस के साथ डीजी बॉर्डर एंड बाउंड्री पुलिस के सलाहकार के रूप में कार्य किया। 2010 में रॉयल इंस्टिट्यूट ऑफ़ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, लंदन में प्रशिक्षण प्राप्त किया।
1999 से 2016 के बीच उन्हें 4 बार राष्ट्रपति का ‘पुलिस वीरता मेडल’ मिला। इसके अलावा राष्ट्रपति का ‘सराहनीय सेवा मेडल’ (2005), ‘यूनाइटेड नेशंस मेडल फ़ॉर पीसकीपिंग इन कोसोवो’ (2008), ‘सिल्वर कमेंडेशन डिस्क’ (2018), ‘गोल्ड कमेंडेशन डिस्क’ (2020) और ‘प्लेटिनम डिस्क’ (2021) से भी सम्मानित किया गया।
वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) में मुख्य महाप्रबंधक (सड़क सुरक्षा एवं यातायात) के पद पर कार्यरत हैं। उनकी अँग्रेज़ी में दो पुस्तकें—‘ऑपरेशन बज़ूका’ और ‘बैज एंड द बुलेट’ तथा हिंदी में ‘वर्चस्व’ प्रकाशित हैं। ‘वर्चस्व’ को 2025 में ‘राजभाषा गौरव पुरस्कार-2024’ का प्रथम पुरस्कार भी मिल चुका है।
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