The Diary of a Young Girl (Hindi)
Paperback
• 276 Pages
• ₹ 199.00
• Hindi
• 9788175993266
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| Publisher | Fingerprint! Publishing |
|---|---|
| ISBN13 | 9788175993266 |
| ASIN/SKU | 817599326X |
| Book Format | Paperback |
| Language | Hindi |
| Pages | 276 |
| List Price | ₹ 199.00 |
| Publishing Date | 01/12/2015 |
| Dimensions | 20 x 12.5 x 1.75 cm |
| Weight | 205 g |
| Book Code | BD00069834 |
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Discover The Diary of a Young Girl (Hindi) by Anne Frank. This book is published by Fingerprint! Publishing in Paperback format, ISBN 9788175993266, ASIN 817599326X, under Biographies and Memoirs, Diaries and Journals, True Accounts.
Book Description
Anne Frank?s diary needs no introduction. This beautifully written memoir of a young girl caught in the middle of one of the most horrific periods of human history, is a testament to the indestructible human will to persevere and survive in the face of the most adverse of circumstances. Where Anne Frank herself became one of the victims of the Second World War, her words, crowding every available inch of space in her diary, survived to keep her story and her memory alive for the rest of the world through the ages..
Author Biography
Annelies Marie Frank (German pronunciation: [ʔanəliːs maˈʁiː ˈʔanə ˈfʁaŋk]; Dutch pronunciation: [ʔɑnəˈlis maːˈri ˈʔɑnə ˈfrɑŋk]; 12 June 1929 - February 1945) was a German-born diarist and writer. She is one of the most discussed Jewish victims of the Holocaust. Her diary, The Diary of a Young Girl, which documents her life in hiding during the German occupation of the Netherlands in World War II, is one of the world's most widely known books and has been the basis for several plays and films.
Born in the city of Frankfurt, Germany, she lived most of her life in or near Amsterdam, the Netherlands. Born a German national, Frank lost her citizenship in 1941 and thus became stateless. The Frank family moved from Germany to Amsterdam in the early 1930s when the Nazis gained control over Germany. By May 1940, they were trapped in Amsterdam by the German occupation of the Netherlands. As persecutions of the Jewish population increased in July 1942, the family went into hiding in some concealed rooms behind a bookcase in the building where Anne's father worked. In August 1944, the group was betrayed and transported to concentration camps. Anne and her sister, Margot, were eventually transferred to Bergen-Belsen concentration camp, where they died (probably of typhus) in February or March 1945, just weeks before the camp was liberated in April.
Otto Frank, the only survivor of the family, returned to Amsterdam after the war to find that Anne's diary had been saved by one of the helpers, Miep Gies, and his efforts led to its publication in 1947. It was translated from its original Dutch version and first published in English in 1952 as The Diary of a Young Girl, and has since been translated into over 60 languages. The diary, which was given to Anne on her thirteenth birthday, chronicles her life from 12 June 1942 until 1 August 1944.
Bio and photo from Wikipedia, the free encyclopedia. Photo by Unknown photographer; Collectie Anne Frank Stichting Amsterdam (Website Anne Frank Stichting, Amsterdam) [Public domain], via Wikimedia Commons.
Born in the city of Frankfurt, Germany, she lived most of her life in or near Amsterdam, the Netherlands. Born a German national, Frank lost her citizenship in 1941 and thus became stateless. The Frank family moved from Germany to Amsterdam in the early 1930s when the Nazis gained control over Germany. By May 1940, they were trapped in Amsterdam by the German occupation of the Netherlands. As persecutions of the Jewish population increased in July 1942, the family went into hiding in some concealed rooms behind a bookcase in the building where Anne's father worked. In August 1944, the group was betrayed and transported to concentration camps. Anne and her sister, Margot, were eventually transferred to Bergen-Belsen concentration camp, where they died (probably of typhus) in February or March 1945, just weeks before the camp was liberated in April.
Otto Frank, the only survivor of the family, returned to Amsterdam after the war to find that Anne's diary had been saved by one of the helpers, Miep Gies, and his efforts led to its publication in 1947. It was translated from its original Dutch version and first published in English in 1952 as The Diary of a Young Girl, and has since been translated into over 60 languages. The diary, which was given to Anne on her thirteenth birthday, chronicles her life from 12 June 1942 until 1 August 1944.
Bio and photo from Wikipedia, the free encyclopedia. Photo by Unknown photographer; Collectie Anne Frank Stichting Amsterdam (Website Anne Frank Stichting, Amsterdam) [Public domain], via Wikimedia Commons.
Editorial Reviews
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Book Summary
द डायरी ऑफ़ अ यंग गर्ल (The Diary of a Young Girl) विश्व की सबसे मार्मिक और प्रेरणादायक आत्मकथात्मक कृतियों में से एक है। यह पुस्तक किसी उपन्यास की तरह कल्पना पर आधारित नहीं है, बल्कि एक किशोरी ऐन फ्रैंक द्वारा लिखी गई वास्तविक डायरी है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, जब नाज़ी शासन यूरोप में यहूदियों पर अत्याचार कर रहा था, तब ऐन और उसका परिवार लगभग दो वर्षों तक एम्स्टर्डम में एक गुप्त स्थान पर छिपकर रहने को विवश हुआ। इसी अवधि में ऐन ने अपने अनुभवों, विचारों, सपनों, डर और उम्मीदों को अपनी डायरी में दर्ज किया। यह कृति केवल युद्ध की कहानी नहीं है, बल्कि एक संवेदनशील किशोरी के मन, उसके विकास और कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहने की इच्छा का सजीव दस्तावेज़ है।
कहानी की शुरुआत ऐन फ्रैंक के तेरहवें जन्मदिन से होती है, जब उसे उपहार के रूप में एक सुंदर डायरी मिलती है। वह इस डायरी को अपनी सबसे करीबी मित्र मानती है और उसका नाम "किटी" रखती है। ऐन अपने मन की हर बात उसी से साझा करती है। स्कूल, परिवार, दोस्तों और अपने दैनिक जीवन के छोटे-छोटे अनुभवों से शुरू होने वाली यह डायरी धीरे-धीरे इतिहास के सबसे भयावह दौर की साक्षी बन जाती है।
जब जर्मनी का नाज़ी शासन नीदरलैंड पर अपना नियंत्रण स्थापित करता है, तब यहूदियों के जीवन पर अनेक कठोर प्रतिबंध लगाए जाने लगते हैं। उन्हें सार्वजनिक स्थानों, विद्यालयों और सामान्य सामाजिक जीवन से धीरे-धीरे अलग किया जाने लगता है। ऐन अपनी डायरी में इन बदलती परिस्थितियों का उल्लेख करती है। वह समझने लगती है कि केवल यहूदी होने के कारण उसके और उसके परिवार के साथ अलग व्यवहार किया जा रहा है। बचपन की सहज दुनिया अचानक भय और अनिश्चितता से भर जाती है।
स्थिति और अधिक गंभीर होने पर ऐन का परिवार एक गुप्त ठिकाने में छिपने का निर्णय लेता है। यह स्थान उसके पिता के कार्यालय की इमारत के पीछे बना हुआ एक छिपा हुआ हिस्सा होता है, जिसे बाद में "सीक्रेट एनेक्स" के नाम से जाना गया। वहाँ केवल ऐन का परिवार ही नहीं, बल्कि एक अन्य परिवार और बाद में एक दंत चिकित्सक भी उनके साथ रहने लगते हैं। कुल मिलाकर आठ लोगों को बहुत सीमित जगह में, अत्यंत सावधानी और पूर्ण गोपनीयता के साथ जीवन बिताना पड़ता है।
गुप्त स्थान का जीवन अत्यंत कठिन है। दिन के समय उन्हें बिल्कुल शांत रहना पड़ता है ताकि नीचे काम करने वाले लोगों को उनकी मौजूदगी का पता न चले। वे खुलकर चल-फिर नहीं सकते, ज़ोर से बात नहीं कर सकते और सामान्य जीवन की छोटी-छोटी स्वतंत्रताओं से भी वंचित रहते हैं। भोजन सीमित होता है, बाहर की दुनिया से संपर्क लगभग समाप्त हो जाता है और हर समय पकड़े जाने का भय बना रहता है। ऐन इन कठिनाइयों का ईमानदारी से वर्णन करती है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि वह केवल दुख ही नहीं लिखती, बल्कि अपने आसपास की छोटी-छोटी खुशियों को भी महसूस करती रहती है।
डायरी का एक महत्वपूर्ण पक्ष ऐन के व्यक्तित्व का विकास है। शुरुआत में वह एक चंचल, बातूनी और कभी-कभी ज़िद्दी किशोरी के रूप में दिखाई देती है। लेकिन समय के साथ उसके विचार अधिक परिपक्व और गहरे होते जाते हैं। वह स्वयं को समझने का प्रयास करती है, अपनी कमियों पर विचार करती है और लगातार बेहतर इंसान बनने की इच्छा व्यक्त करती है। वह महसूस करती है कि लोग अक्सर केवल उसके बाहरी स्वभाव को देखते हैं, जबकि उसके भीतर एक संवेदनशील और गंभीर व्यक्तित्व भी मौजूद है।
ऐन और उसकी माँ के संबंध भी डायरी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। दोनों के बीच कई बार मतभेद होते हैं और ऐन खुलकर अपनी भावनाएँ लिखती है। दूसरी ओर, वह अपने पिता के प्रति गहरा सम्मान और विश्वास व्यक्त करती है। समय के साथ वह यह भी समझने लगती है कि परिवार के प्रत्येक सदस्य पर युद्ध और कैद जैसी परिस्थितियों का अलग-अलग मानसिक प्रभाव पड़ रहा है। यह समझ उसके भीतर सहानुभूति और परिपक्वता को बढ़ाती है।
गुप्त ठिकाने में रहने के दौरान ऐन की मित्रता पीटर वान पेल्स (डायरी में प्रयुक्त नाम) से गहरी होने लगती है। दोनों अकेलेपन, भय और भविष्य की अनिश्चितता के बीच एक-दूसरे में सांत्वना खोजते हैं। ऐन अपने मन में जन्म लेने वाली नई भावनाओं, प्रेम, विश्वास और आत्मीयता को बड़ी ईमानदारी से लिखती है। लेकिन वह यह भी समझती है कि कठिन परिस्थितियों में विकसित होने वाले संबंध सामान्य जीवन से अलग हो सकते हैं। उसकी यह आत्मविश्लेषण की क्षमता डायरी को विशेष गहराई प्रदान करती है।
डायरी में ऐन का सबसे प्रेरणादायक पक्ष उसकी आशा और जिजीविषा है। चारों ओर युद्ध, हिंसा और भय का वातावरण होने के बावजूद वह अपने भविष्य के सपने देखती है। वह लेखिका और पत्रकार बनना चाहती है। उसे विश्वास है कि एक दिन युद्ध समाप्त होगा और वह सामान्य जीवन जी सकेगी। वह पढ़ाई जारी रखती है, नई चीज़ें सीखती है और अपने लेखन को लगातार बेहतर बनाने का प्रयास करती है। यह सकारात्मक दृष्टिकोण उसकी अद्भुत मानसिक शक्ति को दर्शाता है।
ऐन कई बार मानव स्वभाव पर भी गहराई से विचार करती है। वह सोचती है कि लोग इतने क्रूर क्यों हो जाते हैं और युद्ध क्यों होते हैं। इन प्रश्नों के बीच भी वह मानवता पर अपना विश्वास पूरी तरह नहीं खोती। उसकी सबसे प्रसिद्ध भावनाओं में से एक यह है कि तमाम बुराइयों के बावजूद वह अब भी यह मानना चाहती है कि लोगों के भीतर अच्छाई मौजूद है। यह विचार उसकी डायरी को केवल युद्ध का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि आशा का संदेश भी बनाता है।
डायरी का अंत अचानक और अत्यंत मार्मिक है। गुप्त ठिकाने का रहस्य उजागर हो जाता है और वहाँ छिपे सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया जाता है। इसके बाद ऐन की डायरी समाप्त हो जाती है, क्योंकि उसे आगे लिखने का अवसर नहीं मिलता। युद्ध के अंतिम चरण में एक यातना शिविर में उसकी मृत्यु हो जाती है। उसके पिता ओटो फ्रैंक परिवार के एकमात्र जीवित सदस्य थे। युद्ध समाप्त होने के बाद उन्हें ऐन की डायरी मिली, जिसे उन्होंने उसकी इच्छा के अनुरूप प्रकाशित कराया ताकि दुनिया उसकी आवाज़ और उसके अनुभवों को जान सके।
The Diary of a Young Girl केवल एक किशोरी की निजी डायरी नहीं है, बल्कि यह युद्ध, भेदभाव और असहिष्णुता के मानवीय परिणामों का अत्यंत संवेदनशील दस्तावेज़ है। यह पुस्तक हमें बताती है कि सबसे कठिन परिस्थितियों में भी सपने देखना, सीखते रहना और मानवता पर विश्वास बनाए रखना संभव है। ऐन फ्रैंक का जीवन भले ही बहुत छोटा रहा, लेकिन उसके विचार और शब्द आज भी पूरी दुनिया को सहानुभूति, साहस, स्वतंत्रता और शांति का महत्व याद दिलाते हैं।
अंततः यह कृति हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करती है कि घृणा और हिंसा किसी समाज को केवल विनाश की ओर ले जाती हैं, जबकि करुणा, समानता और मानवीय गरिमा ही एक बेहतर भविष्य की नींव बन सकती हैं। यही कारण है कि द डायरी ऑफ़ अ यंग गर्ल आज भी विश्व साहित्य की सबसे प्रभावशाली और भावनात्मक पुस्तकों में गिनी जाती है और हर पीढ़ी को मानवता के मूल्य समझने की प्रेरणा देती है।
कहानी की शुरुआत ऐन फ्रैंक के तेरहवें जन्मदिन से होती है, जब उसे उपहार के रूप में एक सुंदर डायरी मिलती है। वह इस डायरी को अपनी सबसे करीबी मित्र मानती है और उसका नाम "किटी" रखती है। ऐन अपने मन की हर बात उसी से साझा करती है। स्कूल, परिवार, दोस्तों और अपने दैनिक जीवन के छोटे-छोटे अनुभवों से शुरू होने वाली यह डायरी धीरे-धीरे इतिहास के सबसे भयावह दौर की साक्षी बन जाती है।
जब जर्मनी का नाज़ी शासन नीदरलैंड पर अपना नियंत्रण स्थापित करता है, तब यहूदियों के जीवन पर अनेक कठोर प्रतिबंध लगाए जाने लगते हैं। उन्हें सार्वजनिक स्थानों, विद्यालयों और सामान्य सामाजिक जीवन से धीरे-धीरे अलग किया जाने लगता है। ऐन अपनी डायरी में इन बदलती परिस्थितियों का उल्लेख करती है। वह समझने लगती है कि केवल यहूदी होने के कारण उसके और उसके परिवार के साथ अलग व्यवहार किया जा रहा है। बचपन की सहज दुनिया अचानक भय और अनिश्चितता से भर जाती है।
स्थिति और अधिक गंभीर होने पर ऐन का परिवार एक गुप्त ठिकाने में छिपने का निर्णय लेता है। यह स्थान उसके पिता के कार्यालय की इमारत के पीछे बना हुआ एक छिपा हुआ हिस्सा होता है, जिसे बाद में "सीक्रेट एनेक्स" के नाम से जाना गया। वहाँ केवल ऐन का परिवार ही नहीं, बल्कि एक अन्य परिवार और बाद में एक दंत चिकित्सक भी उनके साथ रहने लगते हैं। कुल मिलाकर आठ लोगों को बहुत सीमित जगह में, अत्यंत सावधानी और पूर्ण गोपनीयता के साथ जीवन बिताना पड़ता है।
गुप्त स्थान का जीवन अत्यंत कठिन है। दिन के समय उन्हें बिल्कुल शांत रहना पड़ता है ताकि नीचे काम करने वाले लोगों को उनकी मौजूदगी का पता न चले। वे खुलकर चल-फिर नहीं सकते, ज़ोर से बात नहीं कर सकते और सामान्य जीवन की छोटी-छोटी स्वतंत्रताओं से भी वंचित रहते हैं। भोजन सीमित होता है, बाहर की दुनिया से संपर्क लगभग समाप्त हो जाता है और हर समय पकड़े जाने का भय बना रहता है। ऐन इन कठिनाइयों का ईमानदारी से वर्णन करती है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि वह केवल दुख ही नहीं लिखती, बल्कि अपने आसपास की छोटी-छोटी खुशियों को भी महसूस करती रहती है।
डायरी का एक महत्वपूर्ण पक्ष ऐन के व्यक्तित्व का विकास है। शुरुआत में वह एक चंचल, बातूनी और कभी-कभी ज़िद्दी किशोरी के रूप में दिखाई देती है। लेकिन समय के साथ उसके विचार अधिक परिपक्व और गहरे होते जाते हैं। वह स्वयं को समझने का प्रयास करती है, अपनी कमियों पर विचार करती है और लगातार बेहतर इंसान बनने की इच्छा व्यक्त करती है। वह महसूस करती है कि लोग अक्सर केवल उसके बाहरी स्वभाव को देखते हैं, जबकि उसके भीतर एक संवेदनशील और गंभीर व्यक्तित्व भी मौजूद है।
ऐन और उसकी माँ के संबंध भी डायरी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। दोनों के बीच कई बार मतभेद होते हैं और ऐन खुलकर अपनी भावनाएँ लिखती है। दूसरी ओर, वह अपने पिता के प्रति गहरा सम्मान और विश्वास व्यक्त करती है। समय के साथ वह यह भी समझने लगती है कि परिवार के प्रत्येक सदस्य पर युद्ध और कैद जैसी परिस्थितियों का अलग-अलग मानसिक प्रभाव पड़ रहा है। यह समझ उसके भीतर सहानुभूति और परिपक्वता को बढ़ाती है।
गुप्त ठिकाने में रहने के दौरान ऐन की मित्रता पीटर वान पेल्स (डायरी में प्रयुक्त नाम) से गहरी होने लगती है। दोनों अकेलेपन, भय और भविष्य की अनिश्चितता के बीच एक-दूसरे में सांत्वना खोजते हैं। ऐन अपने मन में जन्म लेने वाली नई भावनाओं, प्रेम, विश्वास और आत्मीयता को बड़ी ईमानदारी से लिखती है। लेकिन वह यह भी समझती है कि कठिन परिस्थितियों में विकसित होने वाले संबंध सामान्य जीवन से अलग हो सकते हैं। उसकी यह आत्मविश्लेषण की क्षमता डायरी को विशेष गहराई प्रदान करती है।
डायरी में ऐन का सबसे प्रेरणादायक पक्ष उसकी आशा और जिजीविषा है। चारों ओर युद्ध, हिंसा और भय का वातावरण होने के बावजूद वह अपने भविष्य के सपने देखती है। वह लेखिका और पत्रकार बनना चाहती है। उसे विश्वास है कि एक दिन युद्ध समाप्त होगा और वह सामान्य जीवन जी सकेगी। वह पढ़ाई जारी रखती है, नई चीज़ें सीखती है और अपने लेखन को लगातार बेहतर बनाने का प्रयास करती है। यह सकारात्मक दृष्टिकोण उसकी अद्भुत मानसिक शक्ति को दर्शाता है।
ऐन कई बार मानव स्वभाव पर भी गहराई से विचार करती है। वह सोचती है कि लोग इतने क्रूर क्यों हो जाते हैं और युद्ध क्यों होते हैं। इन प्रश्नों के बीच भी वह मानवता पर अपना विश्वास पूरी तरह नहीं खोती। उसकी सबसे प्रसिद्ध भावनाओं में से एक यह है कि तमाम बुराइयों के बावजूद वह अब भी यह मानना चाहती है कि लोगों के भीतर अच्छाई मौजूद है। यह विचार उसकी डायरी को केवल युद्ध का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि आशा का संदेश भी बनाता है।
डायरी का अंत अचानक और अत्यंत मार्मिक है। गुप्त ठिकाने का रहस्य उजागर हो जाता है और वहाँ छिपे सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया जाता है। इसके बाद ऐन की डायरी समाप्त हो जाती है, क्योंकि उसे आगे लिखने का अवसर नहीं मिलता। युद्ध के अंतिम चरण में एक यातना शिविर में उसकी मृत्यु हो जाती है। उसके पिता ओटो फ्रैंक परिवार के एकमात्र जीवित सदस्य थे। युद्ध समाप्त होने के बाद उन्हें ऐन की डायरी मिली, जिसे उन्होंने उसकी इच्छा के अनुरूप प्रकाशित कराया ताकि दुनिया उसकी आवाज़ और उसके अनुभवों को जान सके।
The Diary of a Young Girl केवल एक किशोरी की निजी डायरी नहीं है, बल्कि यह युद्ध, भेदभाव और असहिष्णुता के मानवीय परिणामों का अत्यंत संवेदनशील दस्तावेज़ है। यह पुस्तक हमें बताती है कि सबसे कठिन परिस्थितियों में भी सपने देखना, सीखते रहना और मानवता पर विश्वास बनाए रखना संभव है। ऐन फ्रैंक का जीवन भले ही बहुत छोटा रहा, लेकिन उसके विचार और शब्द आज भी पूरी दुनिया को सहानुभूति, साहस, स्वतंत्रता और शांति का महत्व याद दिलाते हैं।
अंततः यह कृति हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करती है कि घृणा और हिंसा किसी समाज को केवल विनाश की ओर ले जाती हैं, जबकि करुणा, समानता और मानवीय गरिमा ही एक बेहतर भविष्य की नींव बन सकती हैं। यही कारण है कि द डायरी ऑफ़ अ यंग गर्ल आज भी विश्व साहित्य की सबसे प्रभावशाली और भावनात्मक पुस्तकों में गिनी जाती है और हर पीढ़ी को मानवता के मूल्य समझने की प्रेरणा देती है।
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