Animal Farm (Hindi)

George Orwell

Paperback • 144 Pages • ₹ 129.00 • Hindi • 9789389567168
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Publisher Fingerprint! Publishing
ISBN13 9789389567168
ASIN/SKU 9389567165
Book Format Paperback
Language Hindi
Pages 144
List Price ₹ 129.00
Publishing Date 01/10/2019
Dimensions 20.3 x 25.4 x 4.7 cm
Weight 150 g
Book Code BD00069833

Discover Animal Farm (Hindi) by George Orwell. This book is published by Fingerprint! Publishing in Paperback format, ISBN 9789389567168, ASIN 9389567165, under Literature and Fiction, Classic Fiction, Contemporary Fiction.

Book Description

What happens when ill-treated farm animals gang up to throw out their lazy, corrupt, and power-drunk rulers? Animal farm is born. As humans get ousted from manor farm and animals take control, their utopian fantasy of running a farm on the basis of equality soon begins to crumble before their eyes. The rebellion of the animals, led by the two pigs, Napoleon and Snowball, gives way to corrupt practices that lead to unthinkable consequences. A resounding fable on totalitarianism and power-gone-corrupt, animal farm is an allegorical novella that took the publishing world by storm when it was first published, and hasn’t stopped doing so ever since. The ultimate satire on Fascism, animal farm finds relevance even in present-day world. A must-read!.

Author Biography

George Orwell is one of England's most famous writers and social commentators. Among his works are the classic political satire Animal Farm and the dystopian nightmare vision Nineteen Eighty-Four. Orwell was also a prolific essayist, and it is for these works that he was perhaps best known during his lifetime. They include Why I Write and Politics and the English Language. His writing is at once insightful, poignant and entertaining, and continues to be read widely all over the world.

Eric Arthur Blair (George Orwell) was born in 1903 in India, where his father worked for the Civil Service. The family moved to England in 1907 and in 1917 Orwell entered Eton, where he contributed regularly to the various college magazines. From 1922 to 1927 he served with the Indian Imperial Police in Burma, an experience that inspired his first novel, Burmese Days (1934). Several years of poverty followed. He lived in Paris for two years before returning to England, where he worked successively as a private tutor, schoolteacher and bookshop assistant, and contributed reviews and articles to a number of periodicals. Down and Out in Paris and London was published in 1933. In 1936 he was commissioned by Victor Gollancz to visit areas of mass unemployment in Lancashire and Yorkshire, and The Road to Wigan Pier (1937) is a powerful description of the poverty he saw there.

At the end of 1936 Orwell went to Spain to fight for the Republicans and was wounded. Homage to Catalonia is his account of the civil war. He was admitted to a sanatorium in 1938 and from then on was never fully fit. He spent six months in Morocco and there wrote Coming Up for Air. During the Second World War he served in the Home Guard and worked for the BBC Eastern Service from 1941 to 1943. As literary editor of the Tribune he contributed a regular page of political and literary commentary, and he also wrote for the Observer and later for the Manchester Evening News. His unique political allegory, Animal Farm was published in 1945, and it was this novel, together with Nineteen Eighty-Four (1949), which brought him world-wide fame.

It was around this time that Orwell's unique political allegory Animal Farm (1945) was published. The novel is recognised as a classic of modern political satire and is simultaneously an engaging story and convincing allegory. It was this novel, together with Nineteen Eighty-Four (1949), which finally brought him world-wide fame. Nineteen Eighty-Four's ominous depiction of a repressive, totalitarian regime shocked contemporary readers, but ensures that the book remains perhaps the preeminent dystopian novel of modern literature.

Orwell's fiercely moral writing has consistently struck a chord with each passing generation. The intense honesty and insight of his essays and non-fiction made Orwell one of the foremost social commentators of his age. Added to this, his ability to construct elaborately imaginative fictional worlds, which he imbued with this acute sense of morality, has undoubtedly assured his contemporary and future relevance.

George Orwell died in London in January 1950.

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Book Summary

एनिमल फ़ार्म (Animal Farm) प्रसिद्ध ब्रिटिश लेखक जॉर्ज ऑरवेल का एक कालजयी लघु-उपन्यास है, जो पहली बार 1945 में प्रकाशित हुआ। पहली दृष्टि में यह खेत के जानवरों की एक साधारण कहानी प्रतीत होती है, लेकिन वास्तव में यह सत्ता, राजनीति, भ्रष्टाचार, प्रचार और मानव स्वभाव पर आधारित एक गहरी रूपक कथा (Allegory) है। इस उपन्यास के माध्यम से ऑरवेल यह दिखाते हैं कि कैसे समानता और न्याय के आदर्शों से शुरू होने वाले आंदोलन समय के साथ सत्ता के लालच, भय और छल के कारण अपने मूल उद्देश्य से भटक सकते हैं। यद्यपि यह कहानी ऐतिहासिक घटनाओं, विशेषकर रूसी क्रांति और उसके बाद के राजनीतिक परिवर्तनों से प्रेरित मानी जाती है, इसके विचार किसी भी समय और समाज में सत्ता के दुरुपयोग को समझने के लिए प्रासंगिक हैं।

कहानी की शुरुआत मैनर फ़ार्म नामक एक खेत से होती है, जहाँ किसान मिस्टर जोन्स जानवरों के साथ कठोर और लापरवाह व्यवहार करता है। खेत के सभी जानवर मेहनत करते हैं, लेकिन उनके श्रम का लाभ केवल मालिक को मिलता है। इसी बीच खेत का सबसे बुज़ुर्ग और सम्मानित सूअर ओल्ड मेजर सभी जानवरों को एक सभा में बुलाता है। वह उन्हें समझाता है कि उनकी सारी समस्याओं का कारण मनुष्य है, क्योंकि मनुष्य स्वयं उत्पादन किए बिना दूसरों की मेहनत का लाभ उठाता है। ओल्ड मेजर एक ऐसे समाज का सपना प्रस्तुत करता है जहाँ सभी जानवर स्वतंत्र हों, समान अधिकारों के साथ रहें और अपने श्रम का फल स्वयं प्राप्त करें। उसके विचार जानवरों के मन में स्वतंत्रता और समानता की इच्छा जगा देते हैं।

कुछ समय बाद ओल्ड मेजर की मृत्यु हो जाती है, लेकिन उसके विचार जीवित रहते हैं। खेत के दो बुद्धिमान सूअर—स्नोबॉल और नेपोलियन—उसके सिद्धांतों को आगे बढ़ाते हैं। अंततः जानवर विद्रोह कर देते हैं और मिस्टर जोन्स को खेत से बाहर निकाल देते हैं। यह क्रांति सफल होती है और खेत का नया नाम एनिमल फ़ार्म रखा जाता है। सभी जानवर मिलकर कुछ मूल नियम बनाते हैं, जिनका उद्देश्य समानता, सहयोग और स्वतंत्रता बनाए रखना होता है। उनमें सबसे प्रसिद्ध सिद्धांत यह होता है कि सभी जानवर समान हैं।

शुरुआत में नया समाज आशा से भरा हुआ दिखाई देता है। सभी जानवर उत्साहपूर्वक काम करते हैं और उन्हें विश्वास होता है कि अब उनका भविष्य बेहतर होगा। स्नोबॉल खेत के विकास के लिए अनेक योजनाएँ बनाता है। वह शिक्षा, संगठन और आधुनिक तरीकों से उत्पादन बढ़ाने का प्रयास करता है। दूसरी ओर नेपोलियन अपेक्षाकृत शांत दिखाई देता है, लेकिन वह धीरे-धीरे अपनी शक्ति बढ़ाने में लगा रहता है। यहीं से सत्ता संघर्ष की शुरुआत होती है।

खेत के सबसे मेहनती जानवरों में बॉक्सर नाम का घोड़ा विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उसका विश्वास है कि यदि वह और अधिक मेहनत करेगा, तो खेत अवश्य समृद्ध बनेगा। उसका जीवन दो सिद्धांतों पर आधारित है—"मैं और अधिक मेहनत करूँगा" और "नेपोलियन हमेशा सही है।" बॉक्सर ईमानदारी, परिश्रम और निष्ठा का प्रतीक है, लेकिन उसकी सरलता और अंधविश्वास उसे शोषण से बचा नहीं पाते। उसके चरित्र के माध्यम से ऑरवेल दिखाते हैं कि मेहनती और ईमानदार लोग भी यदि प्रश्न पूछना छोड़ दें, तो उनका उपयोग सत्ता अपने हित में कर सकती है।

धीरे-धीरे नेपोलियन अपने विरोधियों को हटाना शुरू कर देता है। वह प्रशिक्षित कुत्तों की सहायता से स्नोबॉल को खेत से भगा देता है और स्वयं एकमात्र नेता बन जाता है। इसके बाद खेत में निर्णय सामूहिक रूप से नहीं लिए जाते, बल्कि नेपोलियन अकेले निर्णय लेने लगता है। वह अपने हर कदम को सही ठहराने के लिए स्क्वीलर नामक सूअर का उपयोग करता है, जो प्रभावशाली भाषणों और आधे-अधूरे सच के माध्यम से जानवरों को भ्रमित करता रहता है। स्क्वीलर का चरित्र यह दर्शाता है कि प्रचार और सूचना का नियंत्रण सत्ता को बनाए रखने का एक शक्तिशाली साधन बन सकता है।

समय बीतने के साथ खेत के मूल नियम धीरे-धीरे बदलने लगते हैं। शुरुआत में बनाए गए सिद्धांतों में छोटे-छोटे परिवर्तन किए जाते हैं, जिन्हें अधिकांश जानवर याद भी नहीं रख पाते। हर बदलाव को यह कहकर उचित ठहराया जाता है कि वह खेत के हित में है। धीरे-धीरे सूअर विशेष सुविधाएँ लेने लगते हैं—बेहतर भोजन, आरामदायक जीवन और विशेष अधिकार। समानता का सपना धीरे-धीरे केवल एक नारे तक सीमित रह जाता है।

उपन्यास का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि सामान्य जानवरों की याददाश्त कमजोर होती है और वे अपने अनुभवों की तुलना अतीत से नहीं कर पाते। इसका लाभ उठाकर सत्ता बार-बार इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार बदलती है। जो घटनाएँ वास्तव में हुई थीं, उन्हें अलग रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इससे यह संदेश मिलता है कि यदि समाज इतिहास और सत्य को भूल जाए, तो उसके लिए स्वतंत्रता बनाए रखना कठिन हो जाता है।

कहानी आगे बढ़ने के साथ नेपोलियन का शासन पहले से अधिक कठोर होता जाता है। भय, दंड और प्रचार के माध्यम से सभी जानवरों को नियंत्रित किया जाता है। जो भी विरोध करता है, उसे देशद्रोही घोषित कर दिया जाता है। खेत की परिस्थितियाँ पहले जैसी ही कठिन बनी रहती हैं, लेकिन जानवरों को बार-बार यह विश्वास दिलाया जाता है कि वे पहले से अधिक सुखी और समृद्ध हैं। इस प्रकार वास्तविकता और प्रचार के बीच का अंतर लगातार बढ़ता जाता है।

उपन्यास के अंत में सबसे मार्मिक घटना बॉक्सर के साथ घटती है। वर्षों तक अथक परिश्रम करने के बाद जब वह बूढ़ा और कमजोर हो जाता है, तो उसे सम्मान और देखभाल देने के बजाय उसके साथ विश्वासघात किया जाता है। यह घटना दिखाती है कि निरंकुश सत्ता अक्सर उन लोगों को भी भूल जाती है जिन्होंने उसे मजबूत बनाने में सबसे अधिक योगदान दिया था।

कहानी के अंतिम भाग में सूअर धीरे-धीरे मनुष्यों जैसी जीवनशैली अपनाने लगते हैं। वे उन्हीं सुविधाओं और विशेषाधिकारों का आनंद लेने लगते हैं, जिनका कभी उन्होंने विरोध किया था। अंततः खेत के जानवर सूअरों और मनुष्यों को एक साथ बैठकर भोजन करते हुए देखते हैं, लेकिन अब वे यह पहचान नहीं पाते कि दोनों में अंतर क्या रह गया है। उपन्यास का अंतिम संदेश अत्यंत प्रभावशाली है—सत्ता यदि नैतिकता, जवाबदेही और समानता से दूर हो जाए, तो वह उसी रूप में बदल सकती है जिसका कभी विरोध किया गया था।

Animal Farm केवल राजनीतिक व्यवस्था की आलोचना नहीं करता, बल्कि यह मानव स्वभाव, नेतृत्व, प्रचार, अंधभक्ति और सत्ता की प्रकृति पर भी गहन विचार प्रस्तुत करता है। यह पाठकों को सावधान करता है कि किसी भी समाज में स्वतंत्रता, समानता और न्याय को बनाए रखने के लिए केवल अच्छे आदर्श पर्याप्त नहीं होते। उनके साथ जागरूक नागरिक, सत्य के प्रति प्रतिबद्धता और सत्ता से प्रश्न पूछने का साहस भी आवश्यक है।

अंततः एनिमल फ़ार्म एक सरल कथा के माध्यम से अत्यंत गहरे सत्य सामने लाता है। यह हमें याद दिलाता है कि सत्ता तभी तक जनहित में रहती है, जब तक वह पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और नैतिक मूल्यों से जुड़ी रहती है। जैसे ही भय, झूठ और स्वार्थ उसके केंद्र में आ जाते हैं, समानता के सबसे सुंदर सपने भी धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। यही कारण है कि जॉर्ज ऑरवेल की यह कृति आज भी विश्व साहित्य की सबसे प्रभावशाली और विचारोत्तेजक पुस्तकों में गिनी जाती है।

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