How to Win Friends and Influence People (Hindi)

Dale Carnegie

Paperback • 280 Pages • ₹ 159.00 • Hindi • 9789389053067
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Publisher Fingerprint! Publishing
ISBN13 9789389053067
ASIN/SKU 9389053064
Book Format Paperback
Language Hindi
Pages 280
List Price ₹ 159.00
Publishing Date 06/01/2019
Dimensions 19.6 x 12.8 x 1.5 cm
Weight 220 g
Book Code BD00069827

Discover How to Win Friends and Influence People (Hindi) by Dale Carnegie. This book is published by Fingerprint! Publishing in Paperback format, ISBN 9789389053067, ASIN 9389053064, under Self-Help, Communication and Social Skills, Motivational Self-Help.

Book Description

You can make more friends in two months by becoming interested in other people than you can in two years by trying to get other people interested in you. From the fundamental techniques in handling people to the various ways to make them like you, this book offers insights on how to win people to your way of thinking; how to increase your ability to get things done; the ways to be a leader and change people without arousing resentment; and how to make friends quickly. A timeless bestseller, Dale Carnegies How to Win Friends and Influence People has been an inspiration for many of those who are now famous and successful. With principles that stand as relevant in modern times as ever before, it continues to help people on their way to success.

Author Biography

Dale Carnegie (1888-1955) described himself as a "simple country boy" from Missouri but was also a pioneer of the self-improvement genre. Since the 1936 publication of his first book, How to Win Friends and Influence People, he has touched millions of readers and his classic works continue to impact lives to this day.

Image by Dale Carnegie Created in vector format by Scewing (Heritage Auctions) [Public domain], via Wikimedia Commons

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Book Summary

How to Win Friends and Influence People डेल कार्नेगी की विश्व-प्रसिद्ध पुस्तक है, जिसे पहली बार 1936 में प्रकाशित किया गया था। दशकों बाद भी यह पुस्तक व्यक्तिगत विकास, प्रभावी संवाद और मजबूत रिश्ते बनाने के क्षेत्र में सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली पुस्तकों में से एक है। यह केवल लोगों को प्रभावित करने की तकनीक नहीं सिखाती, बल्कि यह बताती है कि दूसरों के साथ ईमानदारी, सम्मान और सहानुभूति के आधार पर कैसे बेहतर संबंध बनाए जा सकते हैं। लेखक का मानना है कि जीवन में सफलता केवल ज्ञान या प्रतिभा से नहीं मिलती, बल्कि लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करना और उन्हें समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

पुस्तक की शुरुआत इस विचार से होती है कि किसी व्यक्ति की आलोचना, निंदा या शिकायत करने से शायद ही कभी सकारात्मक परिणाम निकलते हैं। जब किसी की गलती पर कठोर टिप्पणी की जाती है, तो वह अपनी रक्षा करने लगता है और अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय बहाने खोजता है। इसलिए लेखक सलाह देते हैं कि दूसरों को दोष देने के बजाय उन्हें समझने की कोशिश करें। हर व्यक्ति अपनी परिस्थितियों, अनुभवों और सोच के आधार पर निर्णय लेता है। यदि हम उसकी स्थिति को समझेंगे, तो हमारे व्यवहार में स्वाभाविक रूप से धैर्य और संवेदनशीलता आएगी।

इसके बाद डेल कार्नेगी बताते हैं कि हर इंसान के भीतर प्रशंसा पाने की गहरी इच्छा होती है। लोग चाहते हैं कि उनके प्रयासों और गुणों को पहचाना जाए। इसलिए यदि हम किसी की सच्चे मन से सराहना करते हैं, तो वह व्यक्ति हमारे प्रति सकारात्मक भावना विकसित करता है। लेखक यह स्पष्ट करते हैं कि झूठी चापलूसी और ईमानदार प्रशंसा में बहुत अंतर होता है। चापलूसी केवल स्वार्थ के लिए की जाती है, जबकि सच्ची प्रशंसा व्यक्ति के वास्तविक गुणों को पहचानने और सम्मान देने से आती है। यही सच्ची सराहना रिश्तों को मजबूत बनाती है।

पुस्तक का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत यह है कि यदि आप चाहते हैं कि कोई व्यक्ति आपके साथ सहयोग करे, तो पहले यह समझिए कि उसकी इच्छाएँ और आवश्यकताएँ क्या हैं। लोग वही काम अधिक उत्साह से करते हैं जिसमें उन्हें अपना लाभ या रुचि दिखाई देती है। इसलिए सफल संवाद का अर्थ केवल अपनी बात कहना नहीं, बल्कि सामने वाले की दृष्टि से सोचना भी है। जब हम दूसरों की जरूरतों और भावनाओं को महत्व देते हैं, तो वे भी हमारी बात को अधिक खुले मन से स्वीकार करते हैं।

लेखक आगे बताते हैं कि अच्छे संबंधों की शुरुआत एक सरल मुस्कान से हो सकती है। मुस्कुराकर बात करना, सामने वाले का नाम याद रखना और उससे सम्मानपूर्वक बातचीत करना छोटी बातें लग सकती हैं, लेकिन इनका प्रभाव बहुत गहरा होता है। किसी व्यक्ति का नाम उसके लिए सबसे प्रिय शब्दों में से एक होता है। जब हम उसका नाम लेकर आत्मीयता से बात करते हैं, तो उसे सम्मान और अपनापन महसूस होता है। इसी प्रकार एक गर्मजोशी भरा व्यवहार किसी भी औपचारिक बातचीत को सहज और यादगार बना सकता है।

डेल कार्नेगी प्रभावी संवाद की कला पर भी विशेष जोर देते हैं। वे कहते हैं कि अच्छा वक्ता बनने से पहले अच्छा श्रोता बनना आवश्यक है। अधिकांश लोग चाहते हैं कि उनकी बात ध्यान से सुनी जाए। यदि हम बिना बीच में टोके, पूरे ध्यान और रुचि के साथ किसी की बात सुनते हैं, तो वह व्यक्ति अपने आपको महत्वपूर्ण महसूस करता है। यह आदत विश्वास पैदा करती है और रिश्तों को मजबूत बनाती है। केवल बोलना ही संवाद नहीं है; सुनना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

पुस्तक में मतभेदों को संभालने की कला पर भी विस्तार से चर्चा की गई है। लेखक के अनुसार किसी बहस में जीतने का सबसे अच्छा तरीका अक्सर बहस से बचना होता है। यदि दो लोग अपनी-अपनी बात साबित करने में लगे रहें, तो अंत में संबंध खराब होने की संभावना अधिक होती है। इसके बजाय यदि हम शांतिपूर्वक सामने वाले की बात सुनें, उसकी राय का सम्मान करें और जहाँ उचित हो वहाँ अपनी गलती स्वीकार करें, तो समाधान निकलने की संभावना बढ़ जाती है। विनम्रता कई बार कठोर तर्कों से अधिक प्रभावशाली सिद्ध होती है।

जब किसी को सुधारने या उसकी गलती बताने की आवश्यकता हो, तब भी लेखक बहुत संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह देते हैं। वे कहते हैं कि सीधे आलोचना करने के बजाय पहले व्यक्ति की अच्छाइयों की प्रशंसा करें और फिर विनम्रता से सुधार का सुझाव दें। यदि हम अपनी गलतियों का उल्लेख पहले कर दें, तो सामने वाले को भी अपनी गलती स्वीकार करने में आसानी होती है। इस प्रकार सुधार अपमान नहीं, बल्कि सहयोग जैसा महसूस होता है।

पुस्तक नेतृत्व के बारे में भी महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत करती है। एक अच्छा नेता आदेश देने के बजाय प्रेरित करता है। वह लोगों को यह महसूस कराता है कि वे किसी महत्वपूर्ण उद्देश्य का हिस्सा हैं। यदि कर्मचारियों, सहयोगियों या परिवार के सदस्यों को सम्मान और जिम्मेदारी दी जाए, तो वे अधिक उत्साह और समर्पण के साथ कार्य करते हैं। लोगों को महत्व देना और उनके योगदान की सराहना करना नेतृत्व की सबसे प्रभावी विशेषताओं में से एक है।

डेल कार्नेगी यह भी बताते हैं कि यदि आप चाहते हैं कि लोग आपके विचारों को स्वीकार करें, तो उन्हें ऐसा महसूस कराइए कि निर्णय उन्होंने स्वयं लिया है। जब किसी पर विचार थोपा जाता है, तो वह उसका विरोध करता है। लेकिन यदि उसे सोचने, प्रश्न पूछने और स्वयं निष्कर्ष तक पहुँचने का अवसर दिया जाए, तो वह उस निर्णय के प्रति अधिक प्रतिबद्ध रहता है। यह सिद्धांत केवल व्यवसाय या प्रबंधन में ही नहीं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन में भी समान रूप से उपयोगी है।

पुस्तक का एक और महत्वपूर्ण संदेश है कि दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। किसी की बात को तुरंत गलत ठहराने या उसका मज़ाक उड़ाने के बजाय यह स्वीकार करना चाहिए कि उसकी अपनी सोच और अनुभव हैं। जब हम किसी व्यक्ति के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास करते हैं, तो मतभेद होने पर भी संबंध खराब नहीं होते। सहानुभूति, धैर्य और सम्मान स्वस्थ संवाद की नींव हैं।

अंततः How to Win Friends and Influence People केवल सफलता प्राप्त करने की पुस्तक नहीं है, बल्कि बेहतर इंसान बनने की भी प्रेरणा देती है। यह सिखाती है कि दूसरों को सम्मान देना, ईमानदारी से उनकी प्रशंसा करना, ध्यानपूर्वक सुनना, विनम्रता बनाए रखना और सहानुभूति के साथ व्यवहार करना जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की कुंजी है। पुस्तक के सिद्धांत सरल हैं, लेकिन यदि उन्हें नियमित रूप से व्यवहार में उतारा जाए, तो वे व्यक्तिगत संबंधों, व्यावसायिक जीवन और नेतृत्व क्षमता में उल्लेखनीय परिवर्तन ला सकते हैं।

डेल कार्नेगी का मुख्य संदेश यही है कि लोगों का दिल जीतने का सबसे प्रभावी तरीका उन्हें नियंत्रित करना नहीं, बल्कि उन्हें समझना, उनका सम्मान करना और उन्हें यह महसूस कराना है कि वे महत्वपूर्ण हैं। यही सोच इस पुस्तक को आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रेरणादायक बनाती है, जितनी यह अपने प्रकाशन के समय थी।

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