Mera Sannyasi | Hindi Edition | Pt. Shri Dhirendra Krishna Shastri | Shri Bageshwar Dham Sarkar

Shri Dhirendra Krishna Shastri

Paperback • 166 Pages • ₹ 299.00 • Hindi • 9789358860689
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Publisher Invincible Publication Pvt Ltd
ISBN13 9789358860689
ASIN/SKU 9358860685
Book Format Paperback
Language Hindi
Pages 166
List Price ₹ 299.00
Publishing Date 04/07/2026
Dimensions 21 x 14 x 3 cm
Weight 250 g
Book Code BD00069268

Discover Mera Sannyasi | Hindi Edition | Pt. Shri Dhirendra Krishna Shastri | Shri Bageshwar Dham Sarkar by Shri Dhirendra Krishna Shastri. This book is published by Invincible Publication Pvt Ltd in Paperback format, ISBN 9789358860689, ASIN 9358860685, under Religion and Spirituality, Theology and Philosophy of Religion.

Book Description

युवा संत पं. श्री धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री
'श्री बागेश्वर धाम सरकार',
पीठाधीश्वर, श्री बागेश्वर धाम, गढ़ा,
जिला छतरपुर, मध्यप्रदेश, भारत

उनतीस वर्षों की जीवन यात्रा में, उन्नीस वर्ष हमने उस विलक्षण और विराट चेतना, 'श्री संती बाबा' के संपर्क में गुज़रे, जिसने एक साधारण बालक को बढ़कर विश्व-कल्याण के सिंहासन पर आसीन कर दिया। वही हमारी वास्तविक शक्ति हैं, हम केवल माध्यम हैं। काया हमारी होती है, जो मात्र एक आवरण है, जबकि इस देह से निकलने वाली वाणी और विचार 'श्री संती बाबा' के होते हैं। हम एक वाद्य यंत्र की भाँति हैं, स्वर हमारे नहीं, लय हमारी नहीं; बजते हम हैं, घोषित हम पढ़ते हैं; लेकिन हमें बजाने वाले 'श्री संती बाबा' हैं। हासिलने दरबार की परंपरा प्रवाहित की; व्यापक दृष्टि, आध्यात्मिक अनुभव, दर्शन, स्वप्न, स्वप्नादेश, अंतःप्रेरणा (अंतर्ज्ञान), सूक्ष्म संकेत, दरबार से संबंधित पुस्तिका, संकेत, किसी व्यक्ति के विषय में अचानक प्राप्त होने वाली चेतावनी या मार्गदर्शन, सभी प्राप्त की कृपा, प्रेरणा, मार्गदर्शन और संकल्प से होता है, न कि हमारी व्यक्तिगत इच्छा या क्षमता से। यह सान्निध्य केवल गुरु-शिष्य का संबंध नहीं, बल्कि एक सूक्ष्म ऊर्जा के साथ एकाकार होने का अनुभव है।

मेरा संन्यासी

आज भारत को शिष्यों की भीड़ नहीं, बल्कि 'गुरुओं की परंपरा' की आवश्यकता है। जब प्रत्येक भारतीय अपने भीतर के गुरु को जागृत करेगा, तब भारत वास्तविक रूप में 'विश्वगुरु' के पद पर प्रतिष्ठित होगा। जो स्वयं स्थिर है, वही दूसरों को स्थिरता दे सकता है। जो स्वयं जुड़ना है, वही दूसरों को जोड़ सकता है। श्री संती बाबा ने सिखाया, जब व्यक्ति अपने भीतर बैठे राम से जुड़ जाता है, जब उसके भीतर हनुमान की शक्ति जागृत हो जाती है, तब वह स्वयं 'गुरु' हो जाता है। लेकिन प्रश्न है कि शक्ति जागृत हो कैसे? उत्तर स्पष्ट है, "यदि वे भी उस चेतना से जुड़ जातीं।" लेकिन उस चेतना के विषय में जाएंगे कैसे? उससे संपर्क कैसे हो? बहाव प्रश्न का उत्तर मिलेगा 'मेरा संन्यासी' में। यह केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक सेतु है, जो जन-जन को उस परम सत्ता से जोड़ने का माध्यम बनेगा।

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